अगर वोट नहीं दोगे तो बिजली कटेगा” — सुपौल से विधायक बिजेंद्र प्रसाद यादव बयान वायरल, विपक्ष ने कहा लोकतंत्र पर हमला

कौन हैं बिजेंद्र प्रसाद यादव?

बिजेंद्र प्रसाद यादव बिहार के एक वरिष्ठ राजनेता हैं और जेडीयू के पुराने नेताओं में से एक हैं।
वे सुपौल विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक चुने जा चुके हैं और बिहार सरकार में ऊर्जा मंत्री हैं।
उनकी छवि अब तक एक अनुभवी और व्यवहारिक नेता की रही है, लेकिन अगर वोट नहीं दोगे तो बिजली कटेगा यह वायरल बयान उनकी राजनीतिक छवि पर सवाल खड़े कर रहा है।

ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का बयान हुआ वायरल

बिहार की राजनीति में एक बार फिर से बयानबाज़ी का दौर गर्मा गया है। राज्य के ऊर्जा मंत्री और सुपौल विधानसभा क्षेत्र के विधायक बिजेंद्र प्रसाद यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे कथित तौर पर ग्रामीणों से कहते नजर आ रहे हैं —
“अगर वोट नहीं दोगे तो बिजली कटेगा।”

इस बयान ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ “धमकी भरा बयान” करार दिया है।

क्या है पूरा मामला

यह घटना सुपौल जिले के मरौना प्रखंड के कमरेल–सरखड़िया गांव की बताई जा रही है।
ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव यहां एक जनसंपर्क कार्यक्रम में पहुंचे थे। ग्रामीणों ने उनसे क्षेत्र में खराब सड़कों की शिकायत की और विकास कार्यों को लेकर नाराजगी जताई।

इसी दौरान, वायरल वीडियो में मंत्री यादव कथित तौर पर कहते हैं —

“जब वोट नहीं दोगे, तो बिजली भी नहीं रहेगी।”

यह बयान सुनते ही भीड़ में हलचल मच गई और किसी ने इसका वीडियो बना लिया। कुछ ही घंटों में यह वीडियो X (Twitter) और Facebook पर तेजी से वायरल हो गया।

सोशल मीडिया पर मचा हंगामा

वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं बाढ़ की तरह आने लगीं।
कई यूज़र्स ने इसे “जनता को डराने वाला बयान” कहा, तो कुछ ने इसे “राजनीतिक कटाक्ष” बताते हुए मंत्री का बचाव किया।

एक यूज़र ने लिखा:

जनता से वोट मांगना ठीक है, लेकिन बिजली काटने की धमकी देना शर्मनाक है।”

वहीं, कुछ समर्थकों ने कहा कि —

वीडियो को एडिट कर पेश किया गया है, मंत्री का इरादा गलत नहीं था।”

विपक्ष का हमला — लोकतंत्र को ठेस

बिहार में विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ उठा लिया है।
राजद (RJD) और कांग्रेस ने मंत्री के बयान को “लोकतंत्र का अपमान” बताया है।

RJD प्रवक्ता ने कहा:

जब कोई मंत्री जनता से इस तरह की धमकी देता है, तो यह साफ दिखाता है कि सत्ता के नशे ने लोकतंत्र को निगल लिया है।”

कांग्रेस नेता अजय कपूर ने कहा —

बिजली जनता का अधिकार है, किसी राजनीतिक पार्टी की संपत्ति नहीं। यह बयान साफ तौर पर सत्ता का दुरुपयोग है।”

जेडीयू (JDU) का जवाब — बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया

वहीं, जेडीयू (JD(U)) ने मंत्री के बचाव में उतरते हुए कहा कि वीडियो के बयान को “तोड़-मरोड़” कर पेश किया गया है।

पार्टी प्रवक्ता अभय कुमार सिंह ने कहा —

मंत्री जी का मतलब था कि जो क्षेत्र सरकार के साथ मिलकर विकास में सहयोग करेगा, वहां कार्य प्राथमिकता से होंगे। विपक्ष इसे गलत रंग दे रहा है।”

इसके साथ ही जेडीयू ने विपक्ष पर फेक नैरेटिव फैलाने का आरोप लगाया।

वीडियो की जांच की मांग

सुपौल जिले के कुछ सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से वीडियो की सत्यता की जांच कराने की मांग की है।
अगर बयान सच साबित होता है, तो यह आचार संहिता और संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन माना जा सकता है।

RTI कार्यकर्ता राजीव सिंह ने कहा —

बिजली या सरकारी सुविधाएं किसी की राजनीतिक पसंद पर निर्भर नहीं हो सकतीं। यह जनता का मौलिक अधिकार है।”

सुपौल में बिजली और विकास की स्थिति

सुपौल जिला बिहार के सीमावर्ती इलाकों में आता है, जहां अब भी कई गांवों में बिजली और सड़क की समस्याएं बनी हुई हैं।
राज्य सरकार ने यहां कई विकास योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि “विकास की रफ्तार बहुत धीमी है।”

इस विवाद के बाद अब ऊर्जा विभाग की योजनाओं और बिजली वितरण व्यवस्था पर भी जनता का ध्यान गया है।

वायरल वीडियो का असर — चुनावी हवा बदलेगी?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है।
सुपौल क्षेत्र में यादव का दबदबा रहा है, लेकिन विपक्ष अब इस वीडियो को जनता के बीच बड़े मुद्दे की तरह पेश करने की तैयारी में है।

राजनीतिक विश्लेषक अमितेश ठाकुर कहते हैं —

यह बयान भले ही अनजाने में कहा गया हो, लेकिन जनता इसे सरकार की मानसिकता के रूप में देख रही है। इसका असर वोट बैंक पर पड़ सकता है।”

बिजली और वोट का संबंध क्यों संवेदनशील विषय है

बिहार में बिजली की समस्या वर्षों से राजनीतिक मुद्दा रही है।
नीतीश कुमार सरकार ने राज्य में बिजली की आपूर्ति को लेकर कई योजनाएं चलाईं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अब भी शिकायतें जारी हैं।

ऐसे में जब कोई मंत्री बिजली को वोट से जोड़ते हैं, तो यह जनता में असंतोष बढ़ा देता है।

जनता की राय — “बिजली हमारा अधिकार है, एहसान नहीं”

सुपौल के स्थानीय लोगों ने इस बयान पर नाराजगी जताई है।
गांव के निवासी लालमोहन मंडल ने कहा —

हम बिजली बिल देते हैं, तो फिर वोट देने या न देने पर बिजली क्यों कटेगी?”

वहीं, कमरेल गांव की महिला सरपंच ने कहा —

बयान गलत है। नेता को जनता से डर नहीं, सेवा करनी चाहिए।”

विश्लेषण — राजनीतिक भाषण और जनता की भावना

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण जनसंपर्क में नेताओं के मुंह से कई बार ऐसे शब्द निकल जाते हैं जो गलत अर्थ में लिए जाते हैं।
लेकिन जब कोई व्यक्ति मंत्री पद पर होता है, तो उसके हर शब्द की जवाबदेही होती है।

बिजेंद्र यादव जैसे वरिष्ठ नेता से इस तरह की टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जाती, और यही कारण है कि यह मुद्दा अब सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि राजनीतिक नैतिकता पर बहस बन चुका है।

कानूनी पहलू क्या कहते हैं

भारत के संविधान अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन किसी नागरिक को धमकाना या सार्वजनिक सेवाओं को वोट से जोड़ना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of People Act) का उल्लंघन माना जा सकता है।
अगर इस बयान की पुष्टि होती है, तो चुनाव आयोग इसे “गंभीर आचार संहिता उल्लंघन” के तहत नोटिस भेज सकता है।

मंत्री का जवाब — “मेरे बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया”

खुद बिजेंद्र प्रसाद यादव ने एक स्थानीय चैनल से बात करते हुए कहा —

मैंने ऐसा कोई धमकी भरा बयान नहीं दिया। मेरे शब्दों को एडिट कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया है। मैं जनता की सेवा के लिए राजनीति में आया हूं, न कि धमकाने के लिए।”

राजनीतिक असर — विपक्ष को मिला मुद्दा, सरकार डिफेंस पर

विपक्ष अब इस बयान को लेकर विधानसभा में हंगामा करने की तैयारी में है।
जेडीयू की ओर से फिलहाल “वीडियो जांच” की बात कही जा रही है, लेकिन विपक्ष इसे जनता के अधिकारों पर हमला बताकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।

निष्कर्ष

बिजेंद्र प्रसाद यादव का “अगर वोट नहीं दोगे तो बिजली कटेगा” बयान भले ही एक क्षणिक प्रतिक्रिया रही हो, लेकिन इसने बिहार की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है।
इस बयान ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सत्ता में बैठे नेता जनता को डराकर वोट लेने की मानसिकता अपना रहे हैं?

अब देखना होगा कि

  • क्या जेडीयू इस बयान पर कोई आंतरिक कार्रवाई करती है,
  • या फिर यह मुद्दा धीरे-धीरे राजनीतिक धूल में दब जाता है।

एक बात तय है — सुपौल की यह “बिजली-बयान राजनीति” आने वाले चुनावों में एक अहम रोल निभा सकती है।

Written By-NIRAJ KUMAR 31 अक्टूबर 2025

By NIRAJ KUMAR

Niraj Kumar is a content writer, news reporter, and SEO specialist with over 5 years of experience in digital media. He has written thousands of SEO-optimized articles that have ranked successfully on Google Search and Discover. Niraj specializes in news reporting, mobile reviews, and technology updates. When not writing, he enjoys photography, traveling, and exploring new tech. Through taazanews50.in, he aims to provide fast, accurate, and fact-checked news in simple and easy-to-understand language.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *